विचार वीथी: प्रकृति और दाम्पत्य प्रेम का विरला अनूठा प्रेमी गा...

विचार वीथी: प्रकृति और दाम्पत्य प्रेम का विरला अनूठा प्रेमी गा...:   डॉ अरुण तिवारी गोपाल      प्रगतिवादी कवि केदार का जन्म बांदा जिले के बबेरू तहसील के अंतर्गत सुदूर ग्रामीण अंचल कमासिन में हुआ था जन्म ति...

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प्रेम  गीत!! मिलन का विश्वास अक्षयवट हुआ है ॰॰॰॰ दर्द पूरा गा रहा हूँ और आधा प्यार...                 डूब जाते,गीत ही केवट हुआ है॰॰॰॰ अर्घ्य चाहों के लिए प्यासी नदी   ! रूप में खुलकर नयन में जा मुदी  !! दो नयन जोगी जनम के ,हेरते हैं द्वार...              प्रेम ही तो जोगियों का हठ हुआ है ॰॰॰ निभ कहाँ पाये तुम्हारे दो वचन! डबडबाये फिर नहाये दो नयन  !! बिन पढे जो पत्र लौटाया,बरोठे  पार...               रोज आँखे डूबने का तट हुआ है ॰॰॰॰ दाग तुमने,जिन्दगी,की बाँसुरी!  भर नयन हर द्वार वो गाती फिरी !! सौ तरह ,दुनिया करे,सौ सौ जतन....             मिलन का विश्वास अक्षयवट  हुआ है  प्रेम गीत--23 : जान पाया तुम बड़ी प्यासी नदी हो!!!!! फेर कर कंगन हरे ओ प्राणधन ,                            कौन सा जीता किला तुमने॰ गन्ध गोबर की तुम्हें बेचैन करती, और तुम कन्नौज की ही चाह में थे ! एक बाइक थी पुरानी और घिनही, और तुम तो कार वाली राह में थे ।। सच बताना तोड़ बचपन के बचन ,                  कौन सा जीता किला तुमने ॰॰1 रेशमी पर्दों की चम चम चमक में, गाँव की वो टाट पट्टी याद होगी  । रोज शावर में नहा लो खूब चाहे , साथ की बरसात की फरियाद होगी ।। भूलने के व्यर्थ में कर सौ जतन  ,                    कौन सा जीता किला तुमने ॰॰2 आज फिर से नाव तेरे घाट पर थी, जान पाया तुम बड़ी प्यासी नदी हो  । जलधि के महलों में सूखी जा रही हो, है उदासी ही भरी रत्नों लदी हो ।। सिर्फ होने को बड़ी कर क्षार मन ,                 कौन सा जीता किला तुमने